Saturday, March 22, 2025

IPL 2025 - जानिए नया क्या है 

खेल का जलवा, मस्ती का रंग होगा,
छक्कों की बारिश, चौकों का संग होगा!
बैट-बॉल का धमाल, एक्शन कमाल होगा,
IPL 2025
में क्रिकेट बेमिसाल होगा!

तो तैयार हो जाइए IPL 2025 के लिए, क्योंकि इस बार लीग में कुछ ऐसे ट्विस्ट हैं जो पहले IPL इतिहास में आपने पहले कभी नहीं देखे होंगे।

आइये आपको बताते हैं इंडियन प्रीमियर लीग 2025 के अठारहें सीजन में  क्या - क्या नया होने जा रहा है।

 खिलाड़ियों की जेब गरम: ₹7.5 लाख प्रति मैच

खिलाड़ियों के लिए जबरदस्त खुशखबरी है! IPL इतिहास में पहली बार प्लेयर्स को सैलरी के अलावा मैच फीस मिलने जा रही है। BCCI... क्रिकेटर्स को इंडियन प्रीमियर लीग के 17 साल के इतिहास में पहली बार मैच फीस देने जा रहा है। भारतीयों के साथ विदेशी प्लेयर्स को भी मैच खेलने की फीस दी जाएगी।

हर खेलने वाले प्लेयर को चाहे वो इम्पैक्ट प्लेयर ही क्यों न हो प्रति मैच ₹7.5 लाख रुपये मिलेंगे, वो भी नीलामी की कीमत से अलग। ये तो वही बात है कि "खेलो भी, कमाओ भी, और मज़े लूटो!" इतनी मोटी रकम से खिलाड़ियों का जोश तो सातवें आसमान पर होगा। मैदान पर चौके-छक्के लगाने का मोटिवेशन भी डबल होगा।

 नियमों में ट्विस्ट: ICC का दबदबा

अब एक और बड़ा धमाका! IPL ने अपनी पुरानी आचार संहिता को "टाटा-बाय-बाय" कह दिया और ICC की आचार संहिता को अपना लिया। पहले तो IPL का अपना अलग नियम-कानून था, लेकिन अब ये ICC के नियमों हिसाब से खेलेंग, जैसे T20 इंटरनेशनल में होता है। ये तो वही बात हुई  "बढ़ता कद, इंटरनेशनल दायरा,!"  बड़ी लीग में अब होगी बड़ी बातें।  खिलाड़ियों और फ्रेंचाइज़ियों के लिए ये नया रोमांच होगा। जैसा कि कहते हैं, "नए नियम, नई बाज़ी!"

 एक मैच तीन 3 गेंद

इंडियन प्रीमियर लीग 2025 से पहले बीसीसीआई ने एक और चौकाने वाला फैसला लिया है जो वर्ल्ड क्रिकेट की नींद उड़ाने वाला है।  बीसीसीआई ने फैसला किया है कि आईपीएल 2025 के डे-नाइट मैच 3 गेंदों से खेले जाएंगे. मुंबई में हुई कैप्टन मीट में पता चला है कि आईपीएल में एक नया नियम आया है जिसके तहत पहली पारी में एक नई गेंद इस्तेमाल होगी। वहीं दूसरी पारी में चेज़ करने वाली टीम को 2 नई गेंद खेलने को मिलेंगी।
इस नियम को लाने की वजह रात के मैचों में पड़ने वाली ओस (यानी dew) फैक्टर को कम करना है. ओस की वजह से गेंद  फिसलन भरी हो जाती है, जिससे गेंदबाजों को परेशानी होती है और टॉस जीतने वाली टीम को फायदा मिलता है।
सवाल ये है कि दूसरी पारी में स्कोर बचा रही टीम को बिल्कुल नई गेंद मिलेगी या सेमी न्यू गेंद मिलेगी? अभी इस नियम की पूरी परतें खुलनी बाकी हैं।

 सलाइवा से बैन हटा


बीसीसीआई ने आईपीएल 2025 से पहले एक और बड़ा फैसला   लिया है... इस बार गेंदबाज सलाइवा का इस्तेमाल कर सकेंगे. सलाइवा का इस्तेमाल कोविड-19 के बाद से बैन था. ये इंटरनेशनल क्रिकेट में अब तक बैन ही है लेकिन बीसीसीआई ने इसे मंजूरी दे दी है, जिसके बाद अब इंटरनेशनल क्रिकेट में भी इसका असर आपको दिख सकता है।

इम्पैक्ट प्लेयर नियम 2027 तक जारी रहेगा


नये धमाके नये धमाकों के बीच पुरानी रिवायतों को भी एक्सटेंशन  मिल गया है ..इम्पैक्ट प्लेयर नियम को कम से कम 2027 तक बढ़ा दिया गया है.. जिससे टीमें मैच के दौरान एक खिलाड़ी को बदल सकती हैं, जो खेल की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यानी कोच के हाथ में रहेगी मास्टर चाबी, अगर कोई खिलाड़ी मैदान में फेल हो गया? तो बेंच से तुरुप का इक्का लाओ और बाजी पलट दो!

5 टीमों के कप्तान बदले

अब बात करते हैं नये कप्तानों की । इस बार 5 टीमें नए कप्तान के साथ उतर रही हैं। 31 साल के अक्षर इस बार दिल्ली की कप्तानी करेंगे। अक्षर पटेल को दिल्ली ने करीब पौने सत्रह करोड़ में रिटेन किया।  लेफ्ट आर्म स्पिन बॉलिंग ऑलराउंडर दिल्ली के साथ 2019 से जुड़े हैं।

अजिंक्य रहाणे ने IPL के 25 मैचों में कप्तानी की है। वे KKR के नौवें कप्तान होंगे। पिछले सीजन श्रेयस अय्यर कोलकाता के कप्तान थे। रहाणे टीम इंडिया और घरेलू क्रिकेट में मुंबई का नेतृत्व भी कर चुके हैं। उन्होंने मुंबई को पिछले साल सैय्यद मुश्ताक अली टी-20 ट्रॉफी जिताई। 36 साल के रहाणे मौजूदा सीजन के सबसे उम्रदराज कप्तान भी हैं।

ऋषभ पंत IPL इतिहास के सबसे महंगे कप्तान है। लखनऊ ने 27 करोड़ रुपए में उन्हें अपने साथ जोड़ा है। 2021 से 2024 तक दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान थे। उनकी कप्तानी में दिल्ली ने 43 में से 23 में जीत दर्ज की थी।

श्रेयस अय्यर ने पिछले साल कोलकाता को चैंपियन बनाया था ।  30 साल के श्रेयस अय्यर पंजाब किंग्स के 17वें कप्तान हैं। उन्होंने IPL के 70 मैचों में कप्तानी की और 38 में टीम को जीत दिलाई।

17 साल से इ सल्ला कप नमदे का सपना देख रही बेंगलुरू ने मध्यप्रदेश के रजत पाटीदार को टीम की कमान देकर फैन्स को चौंका दिया है। मध्यप्रदेश की टीम को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के फाइनल में ले जा चुके 31 साल के रजत पाटीदार के कंधों पर जिम्मेदारी बहुत बड़ी है । देखना होगा कि सुपरस्टार विराट कोहली के साथ मैदान में उनका तालमेल कैसा होगा । 

इस तरह कुल 10 टीमों  में से 9 के कप्तान भारतीय खिलाड़ी हैं । 2019 के बाद ये पहला मौका है, जब सिर्फ एक टीम का कप्तान विदेशी है। सिर्फ हैदराबाद की कप्तानी ऑस्ट्रेलिया के पैट कमिंस के पास है। इनमें गुजरात टाइटंस के कप्तान शुभमन गिल सबसे युवा हैं। जो 25 साल के हैं ।

पंजाब की टीम में 21 नये खिलाड़ी

इस बार पंजाब ने अपने पूरा दल ही लगभग नया कर दिया है । इस टीम ने सबसे ज्यादा 21 नए खिलाड़ी खरीदे है जबकि  कोलकाता ने 8 नए प्लेयर्स को शामिल किया ।

नया मालिक

नये सीजन में खिलाड़ी ही नहीं मालिक भी बदल रहे हैं। इस बार आईपीएल में एक नये मालिक का दीदार होगा । अब गुजरात टाइटंस का मालिकाना हक टोरेंट ग्रुप के पास होगा। जबकि सीवीसी ग्रुप टीम में 33% हिस्सेदारी बरकार रहेगी ।  रखेगा। टोरेंट ग्रुप फार्मा,  पावर और सिटी गैस वितरण में काम करती है।

 वीडियो लिंक के लिए क्लिक करें 
https://www.youtube.com/watch?v=6f1Pg93RC44&t=25s


Sunday, August 29, 2021

खेल क्या है #NationalSportsDay #राष्ट्रीय_खेल_दिवस



 खेल, उत्सव है,  खेल संस्कृति है, खेल विरासत है 

खेल, हौसला है, खेल हिम्मत है, खेल में गिरना, फिर उठना भी है   


खेल, आशा है, खेल, विचार है , खेल इच्छा है 

खेल, श्रम है, खेल में गति है , खेल परिणाम है  


खेल में खुशी है, खेल सेवा भी है, खेल से सद्भाव भी है 

खेल अच्छा तन  है, खेल उच्च मन है, खेल ही धन है   


खेल में जबरस्त हेल-मेल है 

खेल में बल है, खेल एकता का दल है 


खेल में दिल है, खेल में दिमाग है, खेल दीवानगी है  

खेल साधना है, खेल वरदान है


खेल पराक्रम है, खेल पुरूषार्थ है

खेल विश्वास है,  खेल गौरव का एहसास है 


खेल रणनीति है, खेल में कौशल है 

खेल विजय है, तो खेल के पराजय की भी जय है


खेल में कल्पना है, खेल में भावना है,  

खेल आन है, खेल शान है, अरे! ये है तो जान है 


खेल जीवन का दर्शन है, खेल में मानव मर्म है, खेल में धर्म है 

खेल है तभी तो दुनिया में सारा सदकर्म है 


खेल निश्छल है, खेल सुंदर है  

खेल में सत्य है, खेल में प्रेम है खेल में न्याय है 


खेल ज्ञान है, खेल विज्ञान है, खेल अनुसंधान है 

तू मान या ना मान ..खेल ही ये सारा जहान है 

यही ईश्वर का विधान है 

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नेशनल स्पोर्ट्स डे को समर्पित है

विनम्र 

श्रीधर राव  

#NationalSportsDay

#राष्ट्रीय_खेल_दिवस


Monday, April 26, 2021

जिंदगी कैसे कैसे मौके देती है

शहडोल के स्थानीय चैनल पर चाय पे चर्चा  

https://www.youtube.com/watch?v=JiEQz7FMbjs&t=5s

Tuesday, December 1, 2020

 

ये कैसा कोरोना आया 

हमको होश में लाया 

कमाई के चक्कर में जिस घर से भागे थे 

अब जान- बचाने उस घऱ के आगे थे

सालों से आस-पड़ोस से अनजाने थे 

आंगन में स्वागत को चेहरे सारे जाने- पहचाने थे  

परदेश में हम भूलें चूके थे बंधु और भाई, 

 पड़े मुश्किल में तो दोस्ती ही  काम आई

भागम- भाग के दिनों में अम्मा के फोन से भी बचते थे 

देखो कुदरत की माया... नाती-पोते दादा की गोद में हंसते है

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ये कैसा कोरोना आय़ा 

हमको होश में लाया 

पहले सुबह-शाम को भूलें थे 

गर्मी में कूलर, बारिश में पकौड़े, देखों सर्दी की धूप में झूलें हैं 

कुछ दिन पहले तक हम अपने में खोय़े थे 

 फिर क्यो जैकी हमसे ही खाता है गाय का बछड़ा दौड़ा आता है 

सिर पर आसमान का भान नहीं था

खिड़की की गौरया, छत की बुलबबुल ने बताया पहचान पुराना है

सेहत, स्वाद, सुगंध  से... छूटा सारा नाता था 

बाड़ी की भाजी, बगिया की फुलवारी से तन -मन में छायी हरियाली है 

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ये कैसा कोरोना आया 

हमको होश में लाया 

 नकली हंसी में जीते थे 

अब पेट पकड़ कर हंसते है 

मतबल से ही मिलते थे 

रिश्तों में गर्माहट.. देखों देर रात तक बतियाते हैं  

कल के चक्कर में खूब कलह मचाते थे 

अब तो हम अपने आज को सजाते है 

दौलत-शोहरत का सपना था 

  समझ आ गया खुश रहना और खुशियां देना ही जीना है 

ये कैसा कोरोना आया 

हमको होश में लाया 

सबको होश में लाया 

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Monday, June 1, 2020

हर हर गंगे

आज गंगा दशहरा है । ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दसमी तिथि को भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा धरती पर अवतरित हुई और तब से अब तक युग बीत गये है मां गंगा  अनवरत मानव को तार रही हैं। महान भागीरथ और दिव्य  गंगा के चरणों में मेरा कृतज्ञता का भाव समर्पित हैं।
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एक राजा ने जीवन जंगल में बिता दिया 
भूख -प्यास को भूल वो सर्दी-गर्मी में तपता रहा 
बारिश में गला नहीं, आंधियों में अडिग रहा 
दिन, महीने साल और ना जाने कितनी सदियां एक ही नाम जपता रहा 
थकता था, पर थका नहीं 
हताशा से घिरता था , पर गिरा नहीं 
मृत्यु भी आई लेकिन वो  मरा नहीं 
काल का हर चक्र जब विफल हुआ 
तब उस योगी का पराक्रम सफल हुआ 
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स्वर्ग का द्वार खुला 
दिव्य किरणों  से धरती धन्य हुई
फिर ना रूकी वो ऐसे दौड़ी  
अंतरिक्ष में पायल गूंजी 
क्षितिज में पदचाप का शोर उठा   
देव, यक्ष, गंधर्व, अप्सराएं   तकते रह गये 
उस आमंत्रण में सब के सब सम्मोहित रह गये 
उस देवी की  आतुरता ने उसे भूमंडल पर पहुंचा दिया ।
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दिव्य हिमालय कृतकृत्य हुआ 
वो उपवन हरितिमा से  भर गया  
वृक्षों ने किल्लोल किया 
पक्षियों ने कलरव के  गाये गीत  
औषधियों ने सुगंध किया
पर्वतराज का रोम- रोम झंकृत था 
तपोभूमि में अदभुत उमंग 
बरसों का वो योगी सहसा सूर्य सा दमक उठा 
उस तेज के सम्मुख,  एक पावन प्रकाश उपस्थित  
आनंद इधर भी,  आनंद उधर भी  
कैसा क्षण था वो
एक, अब भी  आंखों को मूंदे विश्वस्त 
कि वो आएगी 
मेरी पुकार ना व्यर्थ जाएगी 
तो वो, करूणा नयन देखें
कि ये कैसा नर जिसने स्वर्ग को झुका दिया 
अपने पूजन और पुरषार्थ से मुझे धरती पर बुला लिया। 
नभ से सुमन वृष्टि हुई 
देवों के आशीषों की सृष्टि हुई 
संगीत सा स्वर गूंजा 
उठो तपस्वी आंखें खोलों देखों तप कैसे साकार हुआ 
आखिर तुमने गंगा को धरती पर बुला लिया । 
आखिर तुमने धरती पर गंगा को बुला लिया ।    
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हम भागीरथ के वंशज है आईये उनके महान तप का सम्मान करें और मां गंगा का मान करें।  सदैव गंगा भारत में अविरल और निर्मल रहे ये सुनिश्त करें ताकि आने वाले पीढ़ियां गंगाजल से वंचित ना रहे और गंगा दशहरा का उत्सव हमारे आचरण में जीवंत रहे । 

Sunday, April 26, 2020

मृत्यु शैय्या पर पड़ी कांग्रेस को धर्म और नीति की दुहाई शोभा नहीं देती!

अरनब बनाम सोनिया मामले में अपने जाल में ही फंस गयी कांग्रेस


कहते हैं जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है एक ना एक दिन वो गड्ढा उसके लिए खाई का काम करता है। सवाल ये हैं कि इस देश की मीडिया को सरकारी भोंपू बनाने की परंपरा  किसने शुरू की ? सरकारी विज्ञापनों के जरिए मीडिया में भेदभाव की शुरूआत किसने की? किसने मीडिया में अपने चहेते लोगों को उपकृत करने की परंपरा शुरू की? वो कौन से नेता थे, वो कौन सी पार्टी थी और वो कौन से सरकारें थी जिसने मीडिया को दशकों दलाल बना कर रखा । मीडिया के माध्यम से विरोधियों को निपटाने में  छद्म लड़ाई की शुरूआत किसने की? सरकार विरोधी पत्रकारों को जेलों में ठूंसने की परंपरा किसने और क्यों शुरू की? ऐसे हर सवाल पर पहली ऊंगली कांग्रेस और उसके नेताओं पर ही उठती है । यही वजह है कि आज कांग्रेस अपने बुने जाल में ही फंस गयी है ।


ना तो मैं अरनब गोस्वामी स्टाइल की पत्रकारिता का फैन हूं और ना ही चीख-चिल्लाकर अपनी बात कहने का । लेकिन इस वक्त देश के जो भी मूर्धन्य पत्रकार अरनब गोस्वामी को दिन-रात पानी पी- पी कर कोस रहे हैं, उन्हें पत्रकारिता का बुरा उदाहरण बता कर पेश कर रहे हैं , ऐसे जितने भी स्वनाम धन्य पत्रकार है वो खुद अपने गिरेबां में झांके और देखें कि जब उनके हाथ में अधिकार था तो उन्होंने क्या किया था? कैसे उन्होंने सत्ता की दलाली की थी। सरकार की सहूलियत के हिसाब से खेल -खेलते थे । भले ही तरीका गरिमामय दिखता हो । आज उनमें से बहुत सारे नैतिकता की दुहाई देते नहीं थक रहे । 


Sunday, April 12, 2020

सकंट की इस घड़ी में किसानों को कमजोर नहीं होने देंगे - डॉ. विनय सहस्त्रबुद्दे






कोरोना संक्रमण के इस दौर में जब किसान सबसे ज्यादा हताश और परेशान दिख रहा था तब रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी मुंबई और कनेक्टिंग ड्रीम फांउडेशन दिल्ली  के संयुक्त प्रयासों के तहत कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए सक्रिय इंडिया को-विन एक्शन नेटवर्क की एक पहल ने किसानों को उम्मीदों से भर दिया । राज्यसभा सांसद और प्रबोधिनी के वाइस -चेयरमैन डॉं. विनय सहस्त्रबुद्धे की अध्यक्षता में भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकजुट किया गया । जहां सहस्त्रबुद्धे ने बताया कि कोरोना संक्रमण के इस दौर में केंद्र सरकार किसी भी कीमत पर किसानों को अकेला नहीं छोड़ेगी और  होने वाले  नुकसान की भरपाई करने के लिए उन्हें हर संभव मदद करेगी । इस वेबनार के दौरान उन्होंने किसानों को cowinactionnetwork.in के बारें में भी बताया कि कैसे इस पोर्टल के जरिए समाज से मदद लेने और देने वाले एक मंच पर आकर परस्पर सहयोग कर रहे हैं । लॉकडाउन के इस दौर में "आई-कैन" के इस प्रयासों को किसान नेताओं ने अपने लिए भी उपयोगी बताया ।


वेबनार में मौजूद देशभर के किसान प्रतिनिधियों ने  सहस्त्रबुद्दे के सामने मौजूदा दौर की तमाम चुनौतियों से अवगत कराया जैसे कि थोक बाजार और मंडियों का कामकाज सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है । किसानों को खुदरा बाजार में भी अपने उत्पादों को लेकर कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है । डिजिटल साक्षरता का कमी के चलते ऑनलाइन खरीदी और ब्रिकी का भी ज्यादातर खेतिहर किसान लाभ नहीं ले पा रहे है ।  किसानों के प्रतिनिधियों ने बताया कि परिवहन पूरी तरह से ठप पड़ जाने की वजह से कृषि यंत्रों की आवाजाही नहीं पा रही जिसके चलते खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान हो रहा है । समय पर उनकी कटाई नहीं हो पा रही ।  फसल और बीजों के वितरण की समस्या से भी किसान दो-चार हो रहे हैं।




किसान नेताओं की बातों को सुनने के बाद सहस्त्रबुद्धे ने किसानों को सरकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी और भरोसा दिया कि इस मुश्किल घड़ी में समाज के लोग भी किसान के साथ खड़े हैं । उन्होंने बताया कि इंडिया को-विन एक्शन नेटवर्क के जरिए हम उन तमाम उपायों को एक फोरम से जोड़ने की कोशिश करेंगे जहां किसान अपनी फसल, बीज, खाद, कीटनाशक दवाइयां और कृषि उपकरणों से संबंधित अपनी जरूरतों  और परेशानी को खुलकर रखेंगे और उसी फोरम में ऐसे जानकार लोग होंगे जिनके पास किसानों की हर समस्या का समाधान होगा । किसान और समाधान से भरे जानकार जब आमने -सामने होंगे तो  मुसीबत कितनी भी बड़ी हो उसे हल किया जा सकता है ।


लॉकडाउन के इस दौर में किसानों के नेताओं ने वेबनार के जरिए सहस्त्रबुध्दे की इस पहल की बहुत तारीफ की और आत्मविश्वास से भरे किसानों को अब लगता है  कि ट्रैक्टर और कंम्प्यूटर का साथ ही  भारत के किसानों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने में सक्षम है ।


Friday, April 10, 2020

संकटमोचक की भूमिका में इंडिया को-विन एक्शन नेटवर्क



कोरना संकट से निटपने के लिए सरकार और प्रशासन जिस तरह नित नयी योजनाओं पर काम कर रहे हैं, वहीं रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी मुंबई और कनेक्टिंग ड्रीम फांउडेशन दिल्ली  के संयुक्त प्रयास से स्वयंसेवक जरूरमंदों तक पहुंचने के लिए अपने हर संपर्क को एक्टिव कर रहे हैं।  राज्यसभा सदस्य और प्रबोधिनी के वाइस चेयरमैंन विनय सहस्त्रबुद्धे ने बताया कि हर रोज हमारी कोशिश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने की है जिसके लिए हम फोन, वीडियो कांफ्रेंसिंग, मैसेजिंग और तमाम सोशल मीडिया के प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर रहे हैं । उन्होंने बताया कि हमसे जुड़ने वाले हर वॉलेंटियर से हम फिलहाल  ये अपेक्षा कर रहे हैं कि वो अपने आस-पड़ोस पर नजर रखे और ये सुनिश्चित करें कि कोई भी  भोजन, पानी और दवा जैसी अन्य जरूरी चीजों के लिए परेशान ना हो । सहस्त्रबुद्धे के मुताबिक  cowinactionnetwork.in  की पारस्परिक सहयोग की इस  अनोखी पहल ने पूरे भारत में एक नयी जान फूंक दी है  और बेहद सकारात्मक नतीजे सामने आ रहे हैं ।


आई कैन इंडिया कैन-   इस आइडिया के साथ जब  नेटवर्क के लोगों ने  इस काम को आगे बढ़ाया था तो  मकसद लोगों में आत्मविश्वास जगाना था।  लोगों से लोगों के जुड़ने का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ है कि हर आदमी सकंट की इस घड़ी में आगे आकर अपना योगदान दे रहा है । नेटवर्क की साइट पर हर पल देश के कोने -कोने से लोग खुद को वॉलेंटियर के तौर पर रजिस्टर करवा रहे हैं । अब ये एक आंदोलन बन गया है ।   
अन्न दान महादान - सहस्त्रबुद्दे में बताया कि नेटवर्क पर सबसे ज्यादा जरूरतमंद वो लोग है जो या तो झुग्गियों में रहते हैं, दिहाड़ी मजदूर है या फिर बुजुर्ग जो लॉकडाउन में बाहर निकर कर अपने भोजन का प्रबंध नहीं कर सकते । अब हमारे वॉलेंटियर ने हजारों की तादाद में ऐसे इलाके और लोगों के चिन्हित किया और सुनिश्चत किया है कि जब तक लॉकडाउन  जैसे हालात रहेंगे ऐसे लोगों को भोजन और दवा जैसी जरूरी चीजों के लिए परेशान नहीं होना पडेगा और ये काम सतत जारी है ।
 
परोपकरार्थ ईदम शरीरम - सहस्त्रबुद्धे इस बात को लेकर बेहद उत्साहित है कि संकट की घड़ी हमें लोगों की चेतना को जांचने का भी अवसर  मिला ,इस डिजिटल प्लेटफार्म पर हमने ये पाया कि  दुनिया अन्य देशों के मुकाबले भारत के लोग परोपकार में बहुत आगे हैं । हर वॉलेंटियंर और उससे जुड़ने वाले लोग,  स्वयंसेवी संस्थायें क्षमता से आगे बढ़कर इस संकट से लड़ रहे हैं और अपना तन, मन धन सब लगा रहे हैं ।

वसुधैव कुटंबकम - सहस्त्रबुद्धे ने बताया कि इस प्लेटफार्म पर हजारों की तादाद में जुड़े ज्यादातर वॉलेंटियर्स एक दूसरे से अपरिचित है , कभी कोई किसी से नहीं मिला और ना ही देखा । अलग -अलग धर्म, संप्रदाय, जाति और भाषा के लोग, एक दूसरे से एकदम अनजान होकर भी वॉर रूम से सूचना और जानकारी  पाकर ऐसे एक्टिव हो जाते है जैसे पीड़ित या जरूतमंद उनके परिवार का ही सदस्य  हो । राहत पहुंचाने की उनकी सक्रियता और उनकी कर्तव्यपरायणता से जाहिर होता है कि  पूरे विश्व को एक परिवार मानने का बोध हम भारतीयों के रक्त में कितना गहरा है ।   

सर्वे संतु निरामय -   cowinactionnetwork.in का लक्ष्य भारत सरकार और भारत की जनता को सहयोग देना है  और हर हाल में कोरोना से देश को मुक्त करना है । विनय सहस्त्रबुद्दे को भरोसा है जैसे जैसे हमारा नेटवर्क आगे बढ़ेगा हम रोगियों और चिकित्सकों को कैसे मदद पहुंचा सकते हैं उस दिशा में भी आगे बढ़ेंगे। मास्क, सेनेटाइजर, संसाधन और जीवन रक्षक दवाईयों के जरिये भी मदद के लिए हमारे वॉलेंटियर्स कमर कस चुके हैं ।

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Sunday, April 5, 2020

#iSupportLampLighting - दिवालिया दिलजलों का मातम है आज


महामारी से पहले कुछ लोगों को मनोचिकित्सा की जरूरत  


घरों में बंद लोगों को असुरक्षा, निराशा और अवसाद से छुटकारा दिलाने के लिए प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की है कि रविवार की रात 9 बजे दीप जला कर पूरा राष्ट्र कोरोना से लड़ाई में एकजुटता का परिचय दे  लेकिन चंद दिलजलों की आग से धधक उठा  मीडिया, अखबार   और सोशल मीडिया का एक तबका । कुछ दूरदर्शी विद्वानों  ने कहा कि प्रधानमंत्री जी कहीं आगजनी हो गयी तो कौन जवाब देगा?, कुछ तकनीकी विद्वान थे उन्होंने लिखा की पावरग्रिड फेल हो जाएगा । कुछ प्रकांड विद्वान है उनका तर्क था कि प्रधानमंत्री अंधविश्वास को बढ़ावा दे रहे हैं ।  कुछ इतने ज्यादा सवेंदनशील ज्ञानी है कि उन्होंने लिखा की गरीबों के पास खाने को तेल नहीं और प्रधानमंत्री दीये में तेल झोंक रहे हैं ।  कुछ कपालफोड़ विद्वानों की माने तो प्रधानमंत्री सियासत कर रहे है और इस गंभीर परिस्थिति को भी इवेंट बना रहे हैं।

    
इस वक्त देश का बच्चा-बच्चा करोना के विरूद्ध एक अभूतपूर्व लड़ाई लड़ रहा है, इस लड़ाई को सफल बनाने के लिए वो कितना कृतसंकल्पित है  इसका परिचय तभी मिल गया था जब प्रधानमंत्री ने जनता कर्फ्यू का आह्वान किया था  और उस दिन  शाम को पांच बजे अपनी घरों की बालकनी और छतों से थाली और घंटी बजाकर लोगों ने अपने नेता को भरोसा दिया कि हम आपके साथ है । लेकिन घनघोर विद्वानों ने कुतर्कों के ऐसे पुलिंदे खड़े कर दिये कि घंटी से कोरोना कैसे दूर होगा? ताली बजाने से कोरोना कैसे मरेगा, ये कोई मच्छर थोड़े है ? जब देश थाली पीट रहा था तो प्रचंड विद्वान कमरा बंद करके अपनी छाती पीट रहे थे।   

आखिर मौजूदा सरकार विरोधी ये राजनीतिक लोग, ये साहित्यकार, सिनेमाई दिग्गज, वामी, कामी और दामी पत्रकारों की जमात   मुश्किल की इस घड़ी में दीवारों पर सिर क्यों फोड़ रही  हैं? दीप जलाने की जगह ये लोग अपने दिल क्यों जला रहे हैं ? क्यों ऐसी बचकानी दलीलें दे रहे जिससे जनता की बीच इनका मानसिक दिवालियापन खुलकर सामने आ रहा है । 

कोरोना के मामले में विश्वस्वास्थ्य संगठन का साफ-साफ कहना है कि जब तक एक -एक आदमी सावधान नहीं होगा कोरोना से नहीं लड़ा जा सकता । एक आदमी की लापरवाही पूरे समाज की मेहनत पर पानी फेर सकती है । कोरोना से बचाव की इस वक्त कोई दवा नहीं है। कोरोना के सामने दुनिया के विकसित देशों ने घुटने टेक दिये हैं । स्वास्थ्य सेवाओं में अव्वल देशों के राष्ट्राध्यक्ष जनता और मीडिया के सामने फूट-फूट कर रो रहे हैं ।


भारत में कोरोना पूरा दम लगा रहा है । कुछ जाहिल जमात के लोग  कोरोना के साथ मिलकर तबाही की साजिश कर रहे हैं, डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों का मनोबल तोड़ने के लिए नीचता पर उतर आये हैं, उस पर ये विद्वान लोग उनका बचाव ये कह कर कर रहे हैं कि उनके अपने कुछ कायदे है जिसमें किसी को दखल नहीं देना चाहिए । बात- बात में संविधान की दुहाई देने वाले ये विद्वान इन हमलावर जाहिलों के मामले में संविधान को भी नजरअंदाज करने से नहीं चूक रहे ।  दिल्ली में परप्रांतियों को लेकर साजिश लगभग बेनकाब हो चुकी है । विपक्ष इस मुश्किल घड़ी में कोरोना को लेकर सियासी नफे की चालें चल रहा है । आप समझ सकते हैं सरकार के लिए भारत जैसे देश में कोरोना से लड़ना कितना मुश्किल है ।

 इन तमाम विरोधाभासों के बीच भारत का नेतृत्व  जिस तरह से इस वैश्विक आपदा पर फ्रंट से लीड कर रहा  है वो पूरी दुनिया के सामने एक मिसाल बन चुकी हैं। भारत सरकार एकदम सही ट्रेक पर है ,इस वक्त ये लड़ाई ना तो  वेंटीलेंटर से जीती जा सकती है ना मास्क से । ना ही किसी आधुनिक संसाधन से। हां, इसकी जरूरत को किसी भी कीमत पर नकारा नहीं जा सकता ।   विश्व स्वास्थ्य संगठन का साफ- साफ कहना है कि मानव का मनोबल और उसकी सावधानी ही कोरोना के फैलाव को रोक सकती है।  सोशल और फिजिकल डिस्टेंसिंग ही इस वक्त इसका एकमात्र  इसका उपाय और निदान  है। ऐसे में घरों में बंद कोरोना से लड़ रहे लोगों में अगर प्रधानमंत्री दिये की रोशनी  और घंटी के नाद के जरिए जोश बढ़ा रहे हैं, असुरक्षा, निराशा और अवसाद को मात दे रहे है तो कौन सा गुनाह कर रहे हैं ? साफ है प्रधानमंत्री वातावरण को सकारात्मकता से भरना चाहते है तो उनके विरोधी विद्वान नकारात्मका का जहर घोलने में पूरा दम लगा रहे हैं क्योंकि ये सारे विद्वान घरों में बैठ कर कोरोना से नहीं दुनिया भर में मोदी को लेकर जनता के बढ़ते  भरोसे से  घबरा रहे हैं ।       

Friday, April 3, 2020

#IndiaFightsCorona- आओ भारत दीया जलायें

#9baje9minute


आओ भारत दीया जलायें, संसार से कोरोना का ये तिमिर मिटायें
एक दीया संयम का
एक दीया साहस का
एक दीया संघर्ष का
वायरस पर मानव विजय की ज्योति जगमगाये
आओ भारत दीया जलायें, संसार से कोरोना का ये तिमिर मिटायें

एक दीया , रोग से लड़ते साथियों के नाम
एक दीया दें, दिव्य सेवारथियों को सलाम
एक दीया करे, सारी साजिशों को नाकाम
उत्साह, उल्लास और उमंग का प्रकाश फैलायें
आओ भारत दीया जलाये, संसार से कोरोना का ये तिमिर मिटायें

एक दीया अस्तित्व की प्रार्थना में
एक दीया धर्म की साधना में
एक दीया कर्म की आराधना में
नव दीप के दावानल में हर निराशा  जलायें
आओ भारत दीया जलाये, संसार से कोरोना का ये तिमिर मिटायें

Tuesday, March 24, 2020

#IndiaFightsCorona :राष्ट्रीय चरित्र को जांचने का ये एक अवसर

बाहर जा नहीं सकते तो भीतर ही  झांकिये #StayAtHomeSaveLives

इटली से एक दंपत्ति को बेंगलुरू एयरपोर्ट पर जांच के दौरान कोरोना का संदिग्ध पाया गया गया । प्रशासन ने एहतियातन  दोनों को क्वॉरंटीन कर दिया । लेकिन युवती प्रशासन को चकमा देकर फ्लाइट पकड़ कर दिल्ली और फिर दिल्ली से ट्रेन पकड़ कर आगरा, अपने मायके पहुंच गयी । जब बेंगलुरू प्रशासन को इसकी भनक लगी तो आनन -फानन में आगरा प्रशासन को सूचित किया गया । आगरा में युवती के पिता रेलवे अधिकारी है उन्होंने पुलिस से झूठ बोला की बेटी उनके पास नहीं है । बाद में प्रशासन को सख्ती करनी पड़ी और 123 साल के बाद महामारी फैलाने की धाराओं आईपीसी 269 और 270 के तहत उन पर कार्रवाई करने पड़ी । आज आगरा पूरी तरह से लॉक डाउन है । कल्पना करिए  बेंगलुरू -दिल्ली फ्लाइट और दिल्ली आगरा ट्रेन में युवती जिन- जिन लोगों के संपर्क में आयी थी उन तक सूचना पहुंचाने में प्रशासन की कितनी ताकत बर्बाद हुई होगी।


लखनऊ में  सेलेब्रिटी स्टेट्स रखने वाली कनिका कपूर और उससे जुड़े अभिजात्य वर्ग का मामला और भी भयावह है। कनिका का गुनाह ये कि कोरोना संदिग्ध होने के बावजूद उसने जानकारी छुपायी और फिर पैसों के लालच में बड़ी -बड़ी पार्टियों में शिरकत की । अपराध उन लोगों का भी है जिन लोगों ने सरकार की एडवायसरी जारी होने के बाद भी पार्टियों का आयोजन किया । इस गैरजिम्मेदाराना हरकत के चलते देश की संसद के भीतर तक कोरोना का हड़कंप मच गया । कई सांसदों को खुद को क्वॉरंटीन करना पड़ा ।

विदेश में रहने  वाले मध्यप्रदेश के जबलपुर के  चार लोग,  बजाय खुद को क्वॉरंटीन करने के खुले आम घूमने फिरने लगे और पूरे जिले को अभिशप्त कर दिया । ऐसे हाइली क्वॉलीफाइड लोगों के चरित्र के चलते भारत के दूर-दराज के इलाकों में महामारी ने अपने पैर जमा लिये है । मजबूरी में सरकार को छोटे छोटे शहरों को लॉक डाउन करना पड़ रहा है ।

मुंबई के पास पालघर में गरीबरथ के य़ात्रियों ने घबराहट में पुलिस को फोन लगा कर सूचित किया कि चार विदेश से लौटे कोरोना संदिग्ध यात्री ट्रेन में सफर कर रहे हैं जिनके हाथ में क्वॉरंटीन होने की मुहर लगी है । पुलिस को उन्हें ट्रेन से उतारना पड़ा । ऐसे पढ़े- लिखे लोगों की चलते भारतीय ट्रांसपोटेशन खतरे में पड़ गया । सरकार की लाख समझाइश के बाद भी लोग नहीं माने तो  मजबूरी में सरकार को सारी ट्रेन सेवाएं बंद करनी पड़ी ।

सरकार के मना करने के बाद भी लोगों ने दुकानें बंद नहीं की थी । सरकार के मना करने के बाद भी प्राइवेट दफ्तरों ने खुद पर लगाम नहीं लगाई थी । सरकार के मना करने के बाद भी प्राइवेट-स्कूल के लोग टीचरों को जबरिया बुला कर बैठा रहे थे । और जिन लोगों को छुट्टी मिल गई वो सस्ती फ्लाइट और सस्ते होटल्स की वजह से सपरिवार छुट्टियां मनाने निकल गये । जबकि चीन ,इटली, अमेरिका और ईरान की बेबसी से वो अच्छी तरह वाकिफ थे ।

मजबूरी में प्रधानमंत्री को पूरे देश में जनता कर्फ्यू का आह्वान करना पड़ा, रविवार शाम पांच बजे तक तो सब ठीक था लेकिन पांच बजते ही देश के कई शहरो में लोगों ने रैली ही निकाल दी  और पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया ।सरकार ने जोर देकर  कहां था कि बहुत जरूरी हो तभी घर से बाहर निकले तो लोगों के बहाने सुनिए - किसी को टैटू कराने जाना था , तो किसी को ब्यूटी पार्लर। इस तरह लोगों के जरूरी काम सुनेंगे तो आप अपने बाल नोंच लेंगे । दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में सड़कों पर गाड़ियों का  जाम लगना कायम रहा । मजबूरी में महाराष्ट्र समेत कई प्रदेशों में कर्फ्यू लगाना पड़ा । पुलिस को लोगों को घर में रखने के लिए सख्ती करनी पड़ रही है । लेकिन लोगों को समझ नहीं आ रहा है । कई लोग वीआईपी होने की धौंस दिखा कर पुलिस को चकमा रहे हैं ।  सब्जी और राशन की दुकानें देखते ही लोग टूट पड़ रहे हैं । सरकार कह रही है कालाबाजारी मत करो लेकिन लोग सैनेटाइजर और मास्क से पैसा बनाने में नहीं चूक रहे हैं । पानी, सब्जी, राशन, दवा सब को लेकर जहां जिसकों जैसा मौका मिल रहा है लोग लूट है ।

धार्मिक लोगों की बात ही मत करिए वर्ना लोग आप को सांप्रदायिक कहेंगे, मस्जिदों में लोग पहले की ही तरह  जुट रहे है ।   मंदिरों में भी भक्तों की आवाजाही जारी रही  । तब मजबूरी में धार्मिक स्थलों को भी बंद करने का फैसला लेना पड़ा । शाहीन बाग जैसे प्रदर्शनकारी जब ना सरकार की सुने और ना कोर्ट की, तब पुलिस को ही अपना काम करना पड़ा।

 एक तरफ कुछ लोग ईमानदारी से सरकार की सलाह मान कर राष्ट्रीय चरित्र को फॉलो कर रहे हैं तो दूसरी तरफ ज्यादातर लोग अभी भी अपनी जिम्मेदारी नहीं समझ रहे हैं ।  औरते अपने अपने छोटे -छोटे बच्चों के साथ टहल रही है । कई जगह बुजुर्ग बैठकी के लिए बेचैन हो रहे हैं, तो युवा मौका पाते ही परिवार को लेकर आसपास ड्राइविंग कराने के बाज नहीं आ रहे ।कर्फ्यू के चलते कई सोसायटी में कचरेवाला नहीं पहुंच पा रहा है तो लोग अपने दरवाजे में ही कचरे का ढेर लगा कर बैठे है क्योंकि ये उनका काम नहीं है ।

ज्यादातर विरोधी पार्टियां ऐसे संवेदनशील मौके पर क्या कर रही है आप जरा विरोधी नेताओं के ट्विट पढ़ लीजिए । कई मीडिया समूह जागरूकता को लेकर जान झोंक रहे हैं तो कुछ मीडिया समूह  दुनिया के सामने भारत को शर्मिंदा करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं । वो मुद्दों की नहीं, बल्कि निजी मनभेदों को लेकर भड़ास निकाल रहे हैं । वो इस आपदा को निजी राजनीतिक अवसर के तौर पर कैश करा रहे हैं । 

 हालत बहुत बुरी है, लोग स्वअनुशासन में नहीं है , ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों के पास सख्ती करने के सिवा कोई चारा नहीं था क्योंकि आपने प्रमाणित किया कि इससे कम में आप मानेंगे नहीं  और फिर सरकारों से  चूक हो गयी तो यही मौज -मस्ती करने वाले सरकार को जिम्मेदार ठहराने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे । इनता सब होने के बाद भी आइना दिखाने वालों को आप जी भर कोस लेते और खुद को महान बता लेते है ये क्या कम है।

Sunday, October 6, 2019

क्या मां-बेटे में बंट गई कांग्रेस?


मुंबई में राहुल गांधी के समर्थक बीजेपी को जिताने में लगाएंगे दम   

मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम कांग्रेस को निपटाने के काम में जुट चुके हैं उनके बयान से उनके इस संकल्प का अंदाजा लगाया जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा कि मुंबई में 3-4 सीट को छोड़ कर हर जगह हमारी जमानत जप्त होगी, मैं चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं लूंगा और सीधे 24 अक्टूबर को मीडिया से बात करूंगा ताकि वो इस बात की पुष्टि कर सकें।

मुंबई में 36 विधानसभा सीटें है और महाराष्ट्र की जीत का रास्ता यहीं से निकलता है। बीजेपी ने यहां से मौजूदा मंत्री विनोद तावड़े समेत कई दिग्गज विधायकों का टिकट काट दिया है, लेकिन छुटपुट विरोध से ज्यादा ये नेता कोई प्रभाव नहीं छोड़ सके हैं। जाहिर है नेतृत्व दमदार होगा तो किसी हैसियत नहीं है कि खुलकर कुछ बोल सकें। वहीं कांग्रेस में हालात बेकाबू है।


हताशा और निराशा से उपजे हालात में मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम और हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर ने सीधे सीधे आलाकमान को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है। निरुपम ने तो खुल कर ये कह दिया कि पार्टी राहुल और सोनिया के नाम पर दो धड़ों में बंट गई है। यानी की मां-बेटे के नाम पर पार्टी में फूट पड़ चुकी है। उन्होंने कहा –जो लोग राहुल गांधी से जुड़ कर पार्टी में काम कर रहे थे ऐसे तमाम लोगों को सिस्टमेटिकली खत्म करना, उनको महत्वहीन करना और उनको पार्टी के सिस्टम से बाहर निकाल कर फेंक देना ऐसा षड़यंत्र दिल्ली से चलाया जा रहा है  निरुपम के इस बयान को बारीकी से समझने पर आप पायेंगे कि जब राहुल गांधी के हाथ में पार्टी की कमान थी तो उनका काकस अलग था। राहुल के कोर ग्रुप में ज्यादातर युवा थे, सो इन युवाओं ने राहुल के नेतृत्व में जब जहां मौका मिला पार्टी के उम्रदराज और वरिष्ठ लोगों को ठिकाने लगा दिया था। मुंबई के उस समय के तमाम कांग्रेसी दिग्गजों के बावजूद राहुल के करीबी होने के चलते चलते ही निरुपम मुंबई कांग्रेस के अध्य़क्ष बने ये इस बात का उदाहरण हैं। जिसके चलते गरूदास कामत और देवड़ा गुट तक एक हो गये थे।
अब जब कांग्रेस की कमान बेटे के हाथ से निकलकर एक बार फिर मां के हाथ में गई है तो सोनिया समर्थक पुराने नेता भी अपने रंग में लौट चुके है। अपना दुखड़ा सुनाते हुए निरुपम कहते हैं मैं पूरा दम लगा कर भी अपनी पसंद के एक उम्मीदवार को टिकट नहीं दिलवा सका। उन्होंने कहा कि  मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनकी बात को सुनना भी जरूरी नहीं समझा। उन्होंने खड़गे पर जमकर भड़ास निकालते हुए साफ-साफ कहा कि सोनिया जी के ईर्द-गिर्द जो लोग भी बैठे है वो सब बायस्ड हैं, उनकी कोई पकड़ नही, कोई समझ नहीं है, कैसे पार्टी में एक-एक को निपटाया जाय वो लोग इस तरह के षड़यंत्र को अंजाम दे रहे हैं  मुंबई में उर्मिला मातोंडकर और कृपाशंकर सिंह पहले ही कांग्रेस पार्टी से अपना पल्ला झाड़ चुके हैं। महाराष्ट्र के एक और दिग्गज नेता हर्षवर्धन पाटिल ने भी पार्टी छोड़ दी है। जाहिर है कांग्रेस पार्टी दिन- ब -दिन संकट से उबरने के बजाय नयी-नयी मुसीबतों से घिरती जा रही है। राहुल और सोनिया गांधी के समर्थकों की इस फूट का असर हरियाणा में भी बीजेपी की जीत को पुख्ता करता दिख रहा है, जहां पर हरियाणा के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर ने पार्टी छोड़ने के बाद खुल कर कहा कि अब पार्टी में कमेटियां बन जाती है उनमें पांच साल में किसने क्या  काम किया ये उनको पता ही नहीं होता, वहीं पुराने-पुराने चेहरों को अंधा बांटे रेवड़ी चीन्ह-चीन्ह अपनों को देय की तर्ज पर काम चल रहा है।  हरियाणा कांग्रेस हुड्डा कांग्रेस बनती नजर आ रही है यानी हरिय़ाणा में कांग्रेस को हराने का ऐलान कर चुके हैं तंवर। आखिर उनको भी तो अपना ताकत दिखानी है।

लोकसभा चुनावों के बाद के कांग्रेस पार्टी के भीतर के पूरे घटनाक्रम को समझे तो आसान भाषा में यहीं समझ में आ रहा है कि पार्टी ने नेता फिलहाल पार्टी की नहीं बल्कि अपनी-अपनी सोच रहे हैं। राहुल के जमाने में जिन वरिष्ठों ने जिल्लत झेली थी अब वो लोग चुन-चुन अपना बदला ले रहे हैं। शायद वो ये मान चुके हैं कांग्रेस की जीत तो होनी नहीं है कम से कम इस माहौल में अपने विरोधियों को तो निपटाया ही जा सकता है। सो राहुल समर्थकों ने भी कसम खा ली है कि कांग्रेस की जमानत जब्त करवा कर दिग्गजों को उनकी हैसियत बतायी जाये। इस तरह राहुल और सोनिया का गुट मिल कर अपने अपने तरीके लग गया है बची- खुची कांग्रेस को भी ठिकाने लगाने में।

Monday, August 12, 2019

Wednesday, August 7, 2019

धारा 370 की धार में उलझ गयी कांग्रेस

क्या ये कांग्रेस के खत्म होने का संकेत है?

Wednesday, June 19, 2019

Thursday, June 13, 2019

बजट में हर भारतीय की भागीदारी और सम्मान सुनिश्चित हो


अपनी बातों को रखने से पहले मैं ये स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मैं कोई अर्थशास्त्र का विद्वान नहीं हूं, हां अनुभव और व्यवहारिक ज्ञान से जो मेरे संज्ञान में आया उससे सरकार और वित्त मंत्री को अवगत कराना मेरा कर्तव्य है और अपेक्षा भी।

1-      टैक्स जुटाने के नये स्रोत – इस देश में अभी भी बहुत सारे ऐसे क्षेत्र है जिनसे टैक्स वसूलने के सरकार के पास कोई कारगर और वैज्ञानिक तरीके नहीं है। जैसे कि प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर । भारत के गांव से लेकर महानगरों तक प्राइवेट प्रैक्टिस करनेवाले  डॉक्टर पूरा लेने-देने कैश में करते हैं। इसी तरह सिविल इंजीनियरिंग से लेकर इंटीरियर डिजाइनिंग का काम करने वाले लोग है। बहुत सारे हाई प्रोफाइल कारीगर है,  हाईप्रोफाइल मैकेनिक हैं, बड़े बड़े ठेकदार हैं, मटेरियल सप्लायर है, कोचिंग सेंटर और ट्यूशन पढ़ाने वाले टीचर और प्रोफेसर हैं। बहुत सारे वकील और सीए ऐसे हैं जो मोटी रकम अपने क्लाइंट से वसूलते हैं लेकिन टैक्स के नाम पर सरकार को उसका हिस्सा नहीं मिलता। इसके अलावा ऐसे कई प्रोफेशन है जिसमें व्यक्तिगत तौर कमाई मोटी है लेकिन उनसे टैक्स वसूलने का ऐसा कोई मैकेनिज्म कभी फक्शन में आया नहीं। सरकार को ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर उन्हें टैक्स के दायरे में लाने के मैकेनिज्म के बारे में जरूर कदम उठाना चाहिए।

2-      राष्ट्र का तन और मन बेहतर होगा तो धन आएगा ही - स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी सरकार को बहुत ज्यादा काम करने की जरूरत है ताकि किसी भी भारतीय को इस मामले में भेदभाव का सामना ना करना पड़े। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार लें। इस क्षेत्र में बजट आवंटन के साथ-साथ उसका सही उपयोग हो इसके बारे में भी वित्त मंत्रालय कोई प्रणाली विकसित करें ।   
3-      भारत की नये सिरे से दुनिया में न्याय पूर्ण ब्रांडिंग हो – पिछले 70 साल से दुनिया भर में हमारी ब्रांडिंग ताजमहल और लालकिले तक ही सीमित है। सपेरो और मदारियों वाली छवि साजिश के तरह भारत की बनाई गई है तो क्यों ना हम भारत की प्राचीन स्थापत्य कला, वैभव शाली मूर्तिकला, अद्भुत कर देने वाली वास्तुकला, बेजोड़ चित्रकला, शानदार बुनकर, वस्त्रकला, अस्त्र-शस्त्र विद्या जैसे तमाम ज्ञान को उभारें। इस क्षेत्र में  शिक्षा का भी  अवसर है, रोजगार का भी अवसर है और सबसे ज्यादा पर्यटन उद्योग का और कमाई का। सरकार को इस दिशा कुछ क्रांतिकारी करना चाहिए क्योंकि भारत में प्राचीन वैभव और ज्ञान बिखरा पड़ा है और हम सपेरों और मदारियों की छवि को ढोने को मजबूर हैं। उस पर दुर्भाग्य ये हैं कि भारतीय  ही भारतीय वैभव से अनजान है। जैसे की हम्पी, तमिलनाडु के विशाल मंदिर, दुनिया को बताने की जरूरत है संसद भवन का नक्शा भी मुरैना के योगिनी मंदिर से प्रेरित मालूम पड़ता हैं।

4 - वैदिक विश्वविद्यालय और शोध संस्थान – अपेक्षा है, आशा है और प्रार्थना है कि भारत के वैदिक ज्ञान को एक विश्वविद्यालय का रुप देकर उसे बचाया जाय, संऱक्षित, संवर्धित हो और शोध को बढ़ावा मिले । उसमें वेद हो, आयुर्वेद हो, योग हो, मानवता हो, प्राचीन वैदिक स्थापत्य, मूर्तिकला, प्राचीन टैक्सटाइल,  तमाम प्राचीन भारतीय ज्ञान पर नये सिरे से  वैज्ञानिक तर्कों के साथ शोध हो। इस क्षेत्र में रोजगार, व्यापार के नये अवसर तलाशे जाये।  

5 -     टैक्स पेयर का सम्मान हो – सबसे बड़ी और सबसे अहम बात ये है जिसके पैसों से सरकार चल रही है उस आदमी को, उसके योगदान को कहीं ना, कहीं किसी ना किसी तरह सम्मान सुनिश्चित किया जाये। उसके धन के बदले उसे कम से कम अपमान ना मिले इसकी गारंटी लें सरकार।  टैक्स पेयर के अंदर स्वामित्व का भाव विकसित हो और तमाम नेताओं औऱ सरकारी कर्मचारियों को ये पता हो कि देश टैक्सपेयर के पैसे से चल रहा है और हम सब उनके प्रति कृतज्ञ हैं। इससे टैक्सपेयर का हौंसला बढेगा और लोगों आगे आकर टैक्स देंगे और कहेंगे -
 
नाचीज के हौसले में जितना इजाफा होगा-जमाने में शोहरत और सुकून का उतना ही इजाफा होगा