Saturday, June 18, 2016

सब ठीक है लेकिन ...( पार्ट -5)

क़द्र अब तक तिरी तारीख़ ने जानी ही नहीं
तुझ में शोले भी हैं बस अश्कफ़िशानी ही नहीं
तू हक़ीक़त भी है दिलचस्प कहानी ही नहीं
तेरी हस्ती भी है इक चीज़ जवानी ही नहीं
अपनी तारीख़ का उनवान बदलना है तुझे
कैफी आजमी की लिखी इन  पंक्तियों  में बहुत असर है । फ्लाइंग कैडेट्स भावना कांत, अवनी चतुर्वेदी और मोहना सिंह ने शनिवार को इंडियन एयरफोर्स में इतिहास रच दिया। एयरफोर्स में कमीशन मिलने के साथ ये ऐसी पहली वुमन पायलट्स बन गई हैं, जो फाइटर जेट्स उड़ाएंगी। शनिवार सुबह हैदराबाद के हकीमपेट में इनकी पासिंग आउट परेड हुई। इन वुमन फाइटर पायलट्स को कर्नाटक के बिदर में स्टेज-3 की ट्रेनिंग दी जाएगी। वहां इन्हें 6 महीने तक एडवांस्ड जेट ट्रेनर हॉक उड़ाना सिखाया जाएगा।  इसके बाद वे सुपरसोनिक वॉरप्लेन्स उड़ाएंगी । यानी की खेल, विज्ञान, राजनीति , अंतरिक्ष, एवरेस्ट,  उद्योग-कारोबार, सिनेमा, लगभग हर जगह भारत की बेटियों  ने अपना लोहा मनवा लिया है । जिस बेटी ने हिम्मत दिखाई जिसने हौंसला दिखाई उसने आसमान को झुका दिया ।
सब ठीक है लेकिन क्यों कई समाज में बेटियों को पैदा होने से पहले मार दिया जाता है?
सब ठीक है लेकिन क्यों कई परिवारों  में बेटियों के जन्म पर मातम जैसा माहौल हो जाता है?
सब ठीक है लेकिन क्यों कई इलाकों में बेटियां स्कूल नहीं जा पाती ?
सब ठीक है लेकिन क्यों कई जगहों पर बेटियां जब तक घर नहीं आ जाती मां-बाप की जान हलक में अटकी रहती है?
सब ठीक है लेकिन कई घरों में रसोई गैस के सिलेंडर और केरोसिन बेटियों और बहुओं में फर्क कैसे कर लेते हैं ?
सब ठीक है लेकिन हम गालियों में भी उनकों क्यों नहीं बख्शते?
सब ठीक है लेकिन ...इस लेकिन ने कैफी साहब का भी चैन छीन लिया और इसीलिए उन्हें कहना पड़ा
गोशे-गोशे में सुलगती है चिता तेरे लिये
फ़र्ज़ का भेस बदलती है क़ज़ा तेरे लिये
क़हर है तेरी हर इक नर्म अदा तेरे लिये
ज़हर ही ज़हर है दुनिया की हवा तेरे लिये
रुत बदल डाल अगर फूलना फलना है तुझे
उठ मेरी जान! मेरे साथ ही चलना है तुझे

Friday, June 17, 2016

सब ठीक है लेकिन .. पार्ट -4

एक बार अलबर्ट आइंस्टीन ने कहा था कि आय कर को समझना दुनिया में सबसे कठिन  है । भारत में  जो सबसे ज्यादा कमाई करते है वो उनके पास आयकर चुराने के हजारों तरीके है । और जो वेतन भोगी है वो  टैक्स चुकाने से बच नहीं सकते। 125 करोड़ लोगों के देश में लगभग सिर्फ 5 करोड़ लोग टैक्स देते है । और एक अध्ययन के मुताबिक इतनी तादाद में लोग  सीधे- सीधे इतना ही टैक्स चुरा लेते है । अब भारत के प्रधानमंत्री मोदी की नजर उन पांच करोड़ लोगों पर है । शुक्रवार को आयकर अधिकारियों के एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने आह्वान किया भारत में करदाताओं की संख्या बढ़ाकर 10 करोड़ की जाय । आप सब जानते है कारोबारी, वकील, ठेकेदार , नेता ,डॉक्टर, सीए, कोचिंग शिक्षक जैसे संभ्रात पेशवर लोग आयकर विभाग को चकमा देने में कामयाब हो जाते हैं । और जानिए इस देश में करोड़ों लोगों ऐसे है जिनके लिए लहसुन और प्याज खाना पाप लेकिन रिश्वत खाने में, कर चुराने में कोई पाप नहीं । लेकिन मोदी की मान्यता है कि देश में ज़्यादातर लोग ईमानदार हैं, वे खुद ही टैक्स का भुगतान कर देंगे.। और उसके लिए उन्होंने मंत्र भी दिया है कैसे जवाबदेही सुनिश्चित की जाय । कैसे सत्यनिष्ठा को स्थापित किया जाये । सब ठीक है लेकिन इतने सालों में सरकार करदाओं को ये विश्वास नहीं दिला सकी उनके पैसे का सदुउपयोग होगा ।
सब ठीक है लेकिन आज भी इस देश में सबको  मुफ्त औऱ अच्छी शिक्षा का कोई इंतजाम नहीं है ।
सब ठीक है लेकिन आज भी इस देश में सबको मुफ्त औऱ अच्छी स्वास्थ्य सुविधा का कोई इंतजाम नहीं है ।
सब ठीक है लेकिन आज भी इस देश में सबको साफ पीने का पानी मिल पाता ।
सब ठीक है लेकिन सड़क , बिजली, रोजगार , निर्माण कार्यों औऱ सामाजिक कल्याण जैसे कार्यक्रमों के नाम पर नेता औऱ अधिकारी बेखौफ लूटते हैं ।
सब ठीक है लेकिन जब तक आप कर दाताओं को ये यकीन नहीं दिलाएंगे उनके पैसे का इस्तेमाल सही जगह हो रहा है आप करदाताओं की संख्या नहीं बढ़ा सकते प्रधानमंत्री जी । पांच करोड़ टैक्स पेयर के मत्थे 125 करोड़ लोगों की बात करने वाले प्रधानमंत्री जी कम से कम इस देश के करदाताओं को उनके हिस्से का सम्मान ही दिला दीजिए ।    

Monday, June 13, 2016

सब ठीक है लेकिन ..पार्ट -3

 #UDTA PUNJAB # UDTA CINEMA # UDTA KASHYAP
महान फिल्मकार सत्यजीत रे ने कहा था कि सिनेमा का सबसे असरदार गुण ये है कि वो मानवमन की सूक्ष्मतम बातों को  ग्रहण कर उसे उसी तरीके से प्रस्तुत भी कर देता है । लगता है फिल्म अनुराग कश्यप की फिल्म उड़ता पंजाब  नशे की मानसिकता को इतने असरदार तरीके से प्रस्तुत कर रही है कि जिसे देखने के बाद सेंसर बोर्ड के सर्वेसर्वा पहलाज निहलानी के सिर पर अपने पद का नशा हो गया है और दुनिया को नशे से बचाने के लिए उन्होंने 89 कट का फरमान जारी कर दिया और कह दिया कि नशा कितना भी हो फिल्म के शीर्षक में पंजाब नहीं उड़ेगा ।  उड़ता पंजाब से पंजाब हटाओ । बांबे हाईकोर्ट के आदेश के बाद पहलाज निहलानी  का नशा उतर गया होगा । क्योकि अदालत ने कहा कि  ''सीबीएफ़सी को क़ानून के मुताबिक फ़िल्मों को सेंसर करने का अधिकार नहीं है क्योंकि सेंसर शब्द सिनेमाटोग्राफ़ अधिनियम में शामिल नहीं किया गया है.'' हाईकोर्ट ने कहा कि सेंसर बोर्ड को किसी भी सीन को काटने या बदलने का अधिकार तभी है जब वो संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हो। अब सब ठीक है फिल्म एक कट के साथ 17 जून को उड़ता पंजाब के नाम से ही रीलीज होगी ।
सब ठीक है लेकिन  ये सवाल अनुराग कश्यप से पूछना तो बनता है कि अभिव्यक्ति की आजादी के  नशे में उनका  भारत की तुलना उत्तर कोरिया से करना कितना जायज था ?
सब ठीक है लेकिन अपने रसूख पर हमला होते देख पहलाज निहलानी का खुद को सबसे बड़ा चमचा ठहराना कितना सही था ?
सब ठीक है लेकिन उड़ता पंजाब में वाकई क्या  कुछ नशा है? जो फैसला राकेट की रफ्तार से आया और फिल्म के रीलीज की सारी रूकावटे खत्म हो गई !
 सब ठीक है लेकिन मै और मेरे देश के लोग जानना चाहते है बलात्कार के मामलों में , भष्ट्राचार के मामलों में,  ( लिस्ट बहुत लंबी है ) कास्टिंग काउच के मामलों में , सलमान खान जैसे सितारों के सड़क हादसे के मामले में , काले हिरण शिकार के मामले में , फरदीन खान जैसे सितारों के ड्ग्स लेने के मामलों में, गोविंदा जैसे लोगों के चांटा मारने के मामले में , फिल्मी सितारों के आर्थिक अपराधों के मामलों में अदालतों में फैसले इतनी फुर्ती से क्यों नहीं आते ?
सब ठीक है लेकिन तब फिल्म इंडस्ट्री के  एकजुट होकर  न्याय मांगने का नारा क्यों ठंडा पड़ जाता है ?
सब ठीक है लेकिन कोई फिल्मकार , फैंटम बनकर "उड़ता सिनेमा" भी बना कर दिखाए ,ताकि  महान सत्यजीत रे की उक्ति के अनुसार आखिर वर्तमान सिनेमाजगत की मानसिकता स्क्रीन पर भी स्पष्ट हो ।