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Thursday, May 18, 2017

नये भारत के लिए नये लीडर्स की खोज शुरू, मोदी के सपनों को करेंगे साकार

 रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी, मुंबई (ठाणे) का अभिनव प्रयोग

मौजूदा दौर में जितने भी लीडर्स ने स्वयं को प्रमाणित किया है उनमें से ज्यादातर वो लोग है  जिन्होंने परिस्थितियों के अनुरूप खुद को तराशा, खुद संघर्ष किया, और खुद ही अपना लक्ष्य तय किया और फिर उस रास्ते पर बढ़ने के लिए तन, मन और धन सब कुछ झोंक दिया । लेकिन इसके बावजूद लाखों लोग ऐसे थे जिनमें प्रतिभा थी, क्षमता थी, उन्होंने अपना सर्वस्व दांव पर भी लगाया लेकिन वो ना तो खुद का भला कर सके, ना ही समाज और राष्ट्र को उनका लाभ मिल पाया । कहीं कुछ कमी रह गई और गाड़ी पटरी से उतर गई ।
वर्तमान दौर में भी अगर आप अपने चारों तरफ नजर दौड़ाएंगे तो पाएंगे कि कई लोग भाषण देने की कला में माहिर होते हैं लेकिन अध्ययन पूरा नहीं होता और वो सीमित हो कर रह जाते हैं । कई लोगों में समाज सेवा की भावना होती है, अच्छे समाजसेवी होते है लेकिन फिर भी दिशाहीन होते हैं उनका दायरा बड़ा ही नहीं हो पाता  और कई तो ऐसे होते है जिसने पास नेतृत्व की सारी खूबियां होती है लेकिन उनके पास संपर्क नहीं होता, जिसकी कमी के चलते  अवसर तैयार नहीं हो पाता और वो हताशा और कुंठा में जीने को मजबूर हो जाते हैं।
लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा क्योंकि भारत विश्व मंच पर हर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी एक महाशक्ति के तौर पर स्थापित करने को छटपटा रहा है । इसके लिए उसे देश में मौजूद मानव प्रतिभा का पूरा पूरा इस्तेमाल करना चाहता है ।  भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति से स्पष्ट झलकता है वो भारत को दुनिया के शीर्ष देशों की श्रेणी में देखना चाहते हैं और उसके लिए उन्हें भविष्य में ऐसे लीडर्स की जरूरत होगी जिनके पास समझ को प्रमाणित करने का आचरण हो । पूरी तरह से  शिक्षित, स्किल्ड और अनुभव से भरे लोग चाहिए जिनमें विजन को हासिल करने का विश्वास हो ।
भारत के वर्तमान और भविष्य को इस मांग को मुंबई से संचालित संस्था रामभाऊ म्हालगी ने भांप लिया है और वो जुट गई है ऐसे युवाओं की खोज कर उनका निर्माण करने में । इस दिशा में  नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में देश के मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, आरएमपी संस्थान के अभिनव पाठ्यक्रम "पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन लीडरशिप, पॉलिटिक्स और गवर्नेंस" को लांच करते हुए खुद को  बेहद रोमांचित महसूस कर रहे थे । उन्होंने अपने युवा दिनों को याद करते हुए कहा कि काश इस तरह शिक्षा उन्हें भी मिल पाती । जावड़ेकर ने कहा कि अब राजनीति में वो दौर आएगा जब लोग आसानी से इस पर ऊंगली नहीं उठा पाएंगे । विश्वास की राजनीति का वातावरण और मजबूत होगा ।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेटिक लीडरशिप ( आईआईडीएल ) के तले शुरू हो   रहे इस अनूठे पाठ्यक्रम को  राज्यसभा सांसद और आरएमपी के वाइस चेयरमैन विनय सहस्त्रबुद्धे ने पूरी तरह से वैज्ञानिक सम्मत बताया । उन्होंने भरोसा दिलाया कि हम ऐसे युवाओं का निर्माण करने जा रहे हैं  जिनमें राजनीति से लेकर समाज के हर क्षेत्र में काम करने की विशेष दक्षता होगी । उनका व्यापक दृष्टिकोण भारत के आनेवाले को कल को समृद्ध करेगा ।
आरएमपी के कार्यकारी निदेशक रवींद्र साठे ने बातचीत के दौरान बताया कि पिछले 35 सालों से हम नेतृत्व साधना जैसे साप्ताहिक कार्यक्रमों के जरिए प्रतिभावान युवाओं को तराशने का काम कर रहे थे और उसके नतीजे से उत्साहित होकर ही हमने नौ महीने के व्यापक पाठ्यक्रम को युवाओं को देने का संकल्प लिया है, साठे को उम्मीद है कि काबिल लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति की दिशा में हमारा ये पाठ्यक्रम आशा का केंद्र साबित होगा ।
कोर्स के प्रमुख देवेंद्र का दावा है कि हमने "पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन लीडरशिप, पॉलिटिक्स और गवर्नेंस" को इस तरह से डिजाइन किया है कि युवा को जितना पुस्तकीय ज्ञान होगा उससे ज्यादा हम उसे व्यवहारिक बनाने पर जोर देंगे ।
कार्यक्रम में मौजूद देश के पूर्व चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी , बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव पी मुरलीधर राव और जेएनयू की प्रोफेसर अमिता सिंह ने भी संस्थान के इस प्रयास की सराहना कर बधाई दी ।
तो जिन युवाओं को अपने विज़न को व्यहारिकता में अपनाने की ललक है और वो इस पाठ्यक्रम को अपनाना चाहते हैं तो आईआईडील के इस बेवसाइट  - www.iidl.org.in;  आरएमपी वेबसाइट - www.rmponweb.org पर जाकर विस्तृत जानकारी ले सकते हैं ।