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#लालबत्ती #लालफीताशाही #वीआईपी कल्चर खत्म #लोकतंत्र #प्रधानमंत्री.
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लाल बत्ती गुल, बजा लोकतंत्र का बिगुल
आपको को जनता ने चुना था, आपने जनता से सेवा का वादा किया था, हाथ जोड़- जोड़ कर, पैर पकड़-पकड़ कर आपने अपने लिए वोट मांगा । जनता को आपने भरोसा दिया है कि आपकी ये विनम्रता दिखावटी नहीं, शाश्वत रहेगी।
जनता के हर दुख में आपने साझेदारी का संकल्प लिया । जनता में अपनी उपयोगिता साबित करने के लिए आपने धर्म, मजहब, जात-पात धन-दौलत, ऊंच-नीच, अगड़ा-पिछड़ा, प्रांत-भाषा जहां जिससे जैसी बात बने उसे वैसे लुभाया ।
आप चुनाव जीते, किस्मत से मंत्री बने, आपको सुरक्षा मिली, सेवा करने और सेवक बनने का वादा किया था लेकिन आप तो हमारे सरकार ही बने बैठे और आपके सिर पर लपलपाती ये लाल बत्ती उसी ठगी का बरसों से प्रतीक बनी रही । पहली बार किसी ने इतने ताकतवर तबके पर करारी चोट की है ।
पिछले 70 सालों में हमने पाया कि इस लालबत्ती में दम होता इसे लगाने वालों की पूजा होती, लोग अपने बच्चों को इन लालबत्तीवालों जैसा बनने का उदाहरण देते । लालबत्तीवालों के पीछे लोग स्वार्थवश घूमते रहे लेकिन इस वर्ग ने इसे श्रद्दा समझ लिया । लालबत्ती के दम पर जनता को शक्तिशाली होना था लेकिन इस लालबत्ती के चक्कर में जनता की बत्ती गुल रही । लोकतंत्र के नाम पर सामंती स्वरूप को इस लालबत्ती ने जिंदा रखा।
लाल बत्ती हटाने का मोदी का ये फैसला नेता-अफसरों की इस गठजोड़ पर करारी चोट है जो इस सिस्टम पर कुंडलीमार कर बैठे है और इन लोगों ने ऐसा मकड़जाल बुन रखा है कि परेशान जनता सालों से इसमें फंसती रही और ये उससे अपना पोषण करते रहे ।
जिस तरह नोटबंदी से कालेधन के कुबेर बौखलाये हैं उससे ज्यादा अब हलचल होगी क्योंकि किसी ने पहली बार लालफीताशाही के सुरक्षित किले में सेंध मारी है । सफेदपोशों के गुरूर को चूर किया है ।
अभी तो ताकत के उन्माद का प्रतीक टूटा है, अहंकार से निपटना अभी बाकी है । जनता के सेवकों को आईना दिखाने के लिए धन्यवाद मोदीजी!