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Saturday, April 15, 2017

मोदी वर्सेज देशभक्त मोर्चा

एनसीपी महासचिव और राज्यसभा सांसद देवी प्रसाद त्रिपाठी का बयान है कि अगर मोदी के ख़िलाफ़ वैचारिक और राजनीतिक संघर्ष को कामयाब करना है तो सभी विपक्षी दलों को साथ मिलकर ये लड़ाई लड़नी होगी। ज़रूरी नहीं है कि विपक्षी पार्टियों के साथ आने को महागठबंधन कहा जाए, ये 'देशभक्त मोर्चा' भी हो सकता है।
अब आप अंदाजा लगा लीजिए मोदी का खौफ किस कदर विरोधी पार्टियों पर हावी है । इसकी शुरूआत की थी जम्मू -कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला ने ,  जिस दिन उत्तर प्रदेश के नतीजे आये थे उसी दिन उमर अबदुल्ला ने कहा था इस वक्त देश में मोदी के कद का कोई नेता नहीं है ।  एक टीवी इंटरव्यू में कांग्रेस के नेता मणिशंकर अय्यर भी ये मान चुके हैं कि मोदी को हराने के लिए महागठबंधन पर विचार हो सकता है । ईवीएम के मुद्दे को लेकर मायावती किसी भी दल से हाथ मिलाने को तैयार हैं ।
आने वाले दिनों में सियासी खेल बेहद दिलचस्प होने जा रहा है । शरद पवार से लेकर शरद यादव तक, नवीन पटनायक से लेकर नीतिश कुमार तक ,  ममता से लेकर मायावती तक सब कही ना कहीं 2019 के आम चुनावों  लेकर परेशान हैं । इनमें ज्यादातर वो  लोग हैं जो  किसी वक्त बीजेपी के साथ थे । 1967 में दोनों वामपंथी पार्टियां जनसंघ के साथ समर्थन में थीं । और तब इन लोगों की लड़ाई कांग्रेस के विरुद्ध थी । लेकिन आज जब सत्ता बीजेपी के पास है तो सारे क्षेत्रीय दल कांग्रेस का मुंह ताक रहे हैं । अखिलेश कांग्रेस का दामन थाम कर नतीजा भुगत चुके हैं जिसके चलते  कांग्रेस को भी अपनी हैसियत का अंदाजा तो हो ही गया है ।
अब अगर डीपी त्रिपाठी के मुताबिक सारा विपक्ष एक जुट होकर देशभक्त मोर्चा बनाने की दिशा में आगे बढ़ता है तो   ऐसा आभास होता है कि वर्तमान सरकार के खिलाफ मुद्दों की खोज शुरू हो चुकी है ।  लेकिन सबसे बड़ा सवाल ले है कि कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष के पास क्या कोई ऐसा नेतृत्व है जिसकी बात पर जनता यकीन कर ले । मोदी से लड़ने के लिए और मोदी से जीतने के लिए सिर्फ एकजुटता से काम नहीं चलने वाला  बल्कि एक मिशन लेकर चलना होगा लेकिन इसका कोई आधार दूर- दूर तक नहीं दिख रहा । जनता को साफ समझ आ रहा है कि चुनाव गवां चुकी पार्टियां सत्ता के लिए किस कदर छटपटा रही है।